रिपोर्टर
कमलेश शुक्ला
रायपुर

रायपुर। पार्षद चुनाव के परिणाम आने में कुछ ही घंटे शेष बचे हैं। राजनीति की गहरी समझ रखने वाले कुछ लोगों का मानना है कि रायपुर नगर निगम की राजनीति से गहरा संबंध रखने तीन दिग्गज नेताओं के लिए इस बार का चुनाव काफी टफ रहा है। इन दिग्गजों में निवर्तमान महापौर प्रमोद दुबे, निवर्तमान निगम सभापित प्रफुल्ल विश्वकर्मा एवं संजय श्रीवास्तव शामिल हैं। ये तीनों नेता महापौर पद की दावेदारी के हिसाब से ही चुनावी मैदान में उतरे।

उल्लेखनीय है कि प्रमोद दुबे 2004 एवं 2009 में पार्षद चुनाव जीत चुके हैं। 2014 में उन्हें कांग्रेस से महापौर टिकट मिली और वह चुनाव भी वे जीते। इस बार महापौर जनता नहीं, निर्वाचित पार्षद चुनेंगे। जिस पार्टी का बहूमत आएगा उसी का महापौर बनेगा। इस बार प्रमोेद का का परंपरागत ब्राम्हणपारा वार्ड सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो जाने के कारण उन्हें पंडित भगवतीचरण शुक्ल वार्ड की तरफ रुख करना पड़ा। पंडित भगवतीचरण शुक्ल वार्ड मुस्लिम बहुल माना जाता है और यहां से लगातार कांग्रेस को जीत मिल रही है। यही कारण है कि इस बार प्रमोद ने ब्राम्हणपारा के किसी आसपास क्षेत्र से नहीं बल्कि दूर जाकर पंडित भगवतीचरण शुक्ल वार्ड से लड़ना मुनासिब समझा। भाजपा ने इस वार्ड से सचिन मेघानी को टिकट दी है। राजनीतिक जगत में लगातार इस बात की चर्चा होती रही कि प्रमोद के सामने जान-बुझकर कमजोर  कैंडिडेट दिया गया। फिर भी अंतिम क्षणों में जिस तरह का आकलन सामने आ रहा है उसके अनुसार प्रमोद के लिए यह चुनाव एकतरफा नहीं रहा, बल्कि टक्कर बराबर की रही है। पंडित भगवतीचरण शुक्ल वार्ड में कांग्रेस में भीतरघात होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। राजीव भवन में गहरी पैठ रखने वाले कुछ लोगों का कहना है कि दिग्गज नेताओं का रूझान एजाज ढेबर व ज्ञानेश शर्मा में से किसी एक कोे महापौर बनाने को लेकर है। एजाज ढेबर मौलाना अब्दुल रउफ वार्ड (बैजनाथपारा) एवं ज्ञानेश शर्मा ठाकुर प्यारेलाल सिंह वार्ड से चुनाव लड़े हैं। एजाज ढेबर के लिए यह चुनाव ज्यादा कठिन नहीं रहा लेकिन ज्ञानेश शर्मा के वार्ड में जरूर मुकाबला जोरदार रहा है। ज्ञानेश के सामने भाजपा के बड़े चेहरे अशोक पांडे मैदान में थे।

संजय श्रीवास्तव 1999, 2004 एवं 2009 लगातार तीन बार पार्षद चुनाव जीते थे। जनवरी 2010 में उन्हें रायपुर नगर के सभापति बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। 2009 का चुनाव वे शंकर नगर वार्ड से जीते थे। इस बार शंकर नगर वार्ड सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो जाने कारण उन्हें कालीमाता वार्ड से भाग्य आजमाना पड़ा है। हालांकि संजय पूर्व में कालीमाता वार्ड से भी पार्षद रह चुके हैं, लेकिन तब का समय अलग था। नये परिसीमन में कालीमाता वार्ड की तस्वीर काफी कुछ बदल चुकी है। इसके अलावा 2014 में कालीमाता वार्ड से भाजपा के प्रमोद साहू जीतकर आए थे। भाजपा ने इस बार प्रमोद साहू को महात्मा गांधी वार्ड और उनकी जगह पर संजय को टिकट देने का रिस्की दांव खेला है। संजय का मुकाबला कांग्रेस के अमितेष भारव्दाज से है।

प्रफुल्ल विश्वकर्मा सर्वाधिक चार बार पार्षद रह चुके हैं। वे 1994, 1999, 2009 एवं 2014 मे पार्षद चुनाव लड़े और चारों बार जीते। चारों बार तात्यापारा वार्ड से जीते। 2014 का चुनाव जीतने के बाद तो वे निगम सभापति भी बने। इस बार भी वे तात्यापारा वार्ड से ही चुनावी मैदान में थे। पिछले चुनाव में प्रफुल्ल ने कांग्रेस के रितेश त्रिपाठी को हराया था। कांग्रेस ने एक बार फिर रितेश पर दांव खेला है। सूत्रों की मानें तो रितेश इस बार काफी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतरे थे। दोनों प्रत्याशियों के बीच इस बार कांटे की टक्कर रही।