संवदाता
कमलेश शुक्ला

रायपुर,17 अक्टूबर 2019। दूर्ग के पाटन तहसील के महुदा गाँव में जो ज़मीन गरीब भूमिहीन किसानों को शासकीय योजना के तहत पट्टे पर कृषि कार्य करने हेतु दी गई थी, उस के रिकॉर्ड में हेरफेर उसे नीजि कंपनियों संस्थाओं के नाम करने के आरोप में EOW ने तत्कालीन नायब तहसीलदार पटवारी समेत ज़मीन की ख़रीद करने वाले और उसे फ़र्ज़ी तरीक़े से बेचने वालों के विरुद्ध अपराध दर्ज कर मामले की जाँच शुरु कर दी है।

प्रकरण को लेकर यह जानकारी दी गई है कि महुदा में वर्ष 75-76 में शासकीय योजना के तहत गरीब भूमिहीन किसानों को कृषि कार्य के लिए ज़मीन आबंटित की गई थी। जिसमें तत्कालीन नायब तहसीलदार घनश्याम शर्मा तत्कालीन पटवारी माखन लाल देशमुख और सनत पटेल ने राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर शासकीय पट्टे की भूमि को भूमि स्वामी हक दर्ज कर उस ज़मीन को बिल्डर्स वसुंधरा आयुर्वेदिक अनुसंधान प्रालि के नाम रजिस्ट्री करा दी गई।
नियमानुसार ऐसी किसी ज़मीन का हस्तांतरण को अनुमति अत्यंत अपरिहार्य स्थिति में कलेक्टर ही देते हैं, पर ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई, बल्कि अभिलेखों में छेड़छाड़ कर दिया गया।EOW ने धारा 409,467,468,471,120(B)और 13(1) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधन अधिनियम 2018 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।