रायपुर संवदाता कमलेश शुक्ला

लुभावने ऑफर देकर अपनी प्रॉपर्टी बेचने में मास्टर लगभग सभी बिल्डर प्रॉपर्टी बेचने के बाद खरीददारों से किस तरह का व्यवहार करते हैं यह तो खरीददार ही जानता है। परंतु जो लोग बिल्डरों से प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं वह इनके व्यवहार को कैसे जानेंगे ? ऐसे नये खरीददारों को चाहिये कि किसी भी बिल्डर से फ्लैट, जमीन, मकान, बंगला, दुकान, ऑफिस खरीदने से पहले हमारे द्वारा बताई जा रही सावधानियों पर जरुर ध्यान दें - 


सभी जरूरतमंद जो फ्लैट, जमीन, मकान, बंगला, दुकान, ऑफिस खरीदना चाहते हैं या निवेश करने का प्लान बना रहे हैं, उन्हें चाहिये कि वे जिस किसी बिल्डर से कुछ भी खरीदना चाहते हैं तो सबसे पहले उनका रेरा का रजिस्ट्रेशन, उनके भूमि का परिवर्तन प्रमाण पत्र के साथ ही जो भी लुभावने, आकर्षक, ऑफर उनके द्वारा दिये गये हैं उनके ओरिजिनल ब्रोशर लेकर संभालकर रखें। साथ ही एग्रीमेंट के समय सभी वादों और सुविधाओं की जानकारी इकरारनामा में दर्ज करवा कर नोटरी के साथ-साथ अगर हो सके तो रजिस्टर्ड करवा ले। क्योंकि देखने सुनने में आ रहा है कि अधिकांश बिल्डर बाद में अपने वादों अपने द्वारा दिये गये विज्ञापनों और अपने द्वारा छपाये गये लुभावने ब्रोशरों से मुकर जाते हैं। क्योंकि ब्रोशरों में बिल्डरों के दस्तखत नहीं होते और ना ही वे प्रमाणित होते हैं। इसलि, भविष्य में वे ऐेसे किसी पांपलेट,पोस्टर, ब्रोशर को मानने से इनकार कर देते हैं।
अब हम आपको आज की इस कड़ी का उदाहरण देने जा रहे हैं वह भी प्रमाण सहित।
मामला है लास विस्टा रेसिडेंट अमलीडीह रायपुर का अमृत होम्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित बिल्डर्स ने लास विस्टा रेसिडेंट कॉलोनी का प्रोजेक्ट तैयार किया जिसे लुभावने ऑफरों के साथ बेचा। लोगों ने खरीदा भी परन्तु बिल्डर्स ने अपने वादों के अनुसार सभी सुविधायें उपलब्ध नहीं करवाई। पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सार्वजनिक प्रसाधन, कचरे का निष्पादन, आरडब्ल्यू,एवं एसटीपी रखरखाव के वादों को पूरा नहीं किया।
साथ ही कापर्स फंड भी कॉलोनी के रहवासियों पर बिल्डर द्वारा खर्च नहीं किया गया और कॉलोनी में रहने वाले सदस्यों से 3 करोड़ 80 लाख 54 हजार रुप, वसूल लिये गये -

अव्यवस्थाओं से परेशान तथा कापर्स फंड बिल्डर द्वारा अपने पास रख लिये जाने के खिलाफ मैसर्स लास विस्टा रेसिडेंट वेलफेयर सोसाइटी को कानून की शरण लेनी पड़ी - जहां दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने बिल्डर के खिलाफ आदेश जारी किया। जिसके अनुसार बिल्डर्स को ब्रोशर के अनुसार विकास कार्यों को पूर्ण ना करने के लिये जिम्मेदार ठहराते हुये 2 माह के भीतर अर्थात अगस्त 2019 तक अपने खर्च से कार्य पूर्ण करने का आदेश दिया।
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में बिल्डर को जिम्मेदार ठहराते हुये इस प्रोजेक्ट में अन्य बचे भूखंडों की बिक्री पर भी रोक लगा दी। साथ ही न्यायालय ने कापर्स फंड की राशि एक करोड़ 52 लाख 50 हजार रुपये कॉलोनी की रेसिडेंट सोसाइटी को अगस्त 2019 तक देने का आदेश जारी किया।

हम आपको बता दें कि 6 जून 2019 को जारी आदेश का पालन न करते हुए अमृत होम्स प्राइवेट लिमिटेड के बिल्डर्स ने अक्टूबर 2019 तक आदेशित किसी भी व्यवस्था को पूर्ण नहीं किया और ना ही एक करोड़ 52 लाख 50 हजार रुपये की राशि रेसिडेंट सोसाइटी को दी।
इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बिल्डर किस तरह अपने रुपयों एवं प्रभाव के बल पर उनके प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट करने वाले लोगों के साथ धोखाधड़ी करते  आपसे आग्रह करता है कि संबंधित विभागों के अधिकारियों से बिल्डर की वस्तु स्थिति की प्रमाणिकता प्राप्त करने के बाद ही किसी भी तरह की खरीदारी करें। अन्यथा आपको भी इन पुराने खरीददारों की तरह बिल्डरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे या फिर परेशान होकर कोर्ट कचहरी की परेशानियों में उलझना पड़ेगा।
      आशा करते हैं हमारे द्वारा प्रमाण सहित दी गई जानकारी आपके भविष्य के सपनों को टूटने से बचायेगी तथा परेशानियों से दूर रखेगी।